रविवार, अप्रैल 28, 2013

मन के हारे हार है मन के जीते जीत

कहा गया है ,'खाली दिमाग शैतान का घर होता है ',अतः कभी भी दिमाग को खाली नहीं रखना चाहिये ।
कहीं न कहीं ,किसी भी काम में इसे ब्यस्त रखना चाहिए तभी इसे नियंत्रित किया जा सकता है । योग में भी
दिमाग को नियंत्रित करने हेतु जो उपाय बताये गए हैं ,उससे भी हम इसी निष्कर्ष में पहुंचते हैं कि दिमाग को
भटकने नहीं देना चाहिए ।

योग में एक क्रिया है 'योगनिद्रा 'की । इस क्रिया में हम मन को अपने अनुसार ब्यस्त रखते हैं और मन को नियंत्रित करते हैं । यदि हम मन के द्वारा नियंत्रित हो गए तो बहुत सारी गलतियाँ या अपराध होना निश्चित है। योग में दुसरा उपाय है 'मंत्र जाप 'का । यदि आपके पास समय है और मन को नियंत्रित करना है तो आप
ध्यान के किसी आसन में बैठ जाइये और अपने गुरुमंत्र का जाप कीजिये अथवा किसी भी अन्य मंत्र का जाप कीजिये ,आपका मन एकाग्र होकर तुरन्त नियंत्रित हो जायेगा ।

मन बहुत ही शक्तिशाली होता है । इसीलिये एक मुहावरा यह भी कहा जाता है ,'मन के हारे हार है मन के जीते जीत। 'आपने भी अनुभव किया होगा कि यदि हमारा मन  प्रारम्भ में ही हार  मान लेता है तो फ़िर हम किसी भी
 काम में सफलता हासिल नहीं कर सकते और इसके विपरीत यदि हमने मन में ठान लिया कि अमुक काम
को करना है तो हम कठिन से कठिन काम को भी आसानी से पूरा कर लेते हैं ।

अधिकांश समय हम मन के द्वारा ही संचालित रहते हैं ,लेकिन साधु संत ,जिन्होंने मन को जीत लिया है
कभी भी मन के द्वारा नियंत्रित नहीं रहते ,अपितु वे स्वतः मन को नियंत्रित रखते हैं और तभी वे एक ऐसी स्थिति में पहुँच जाते हैं ,जहाँ वे किसी भी परिस्थिति में जीने में सक्षम होते हैं ।

अतः मेरा आप सबों से निवेदन है कि आप भी मन को नियंत्रित करने का मार्ग जरुर अपनाएँ ।
ये साधनायें कठिन जरुर है लेकिन असंभव नहीं ।

हरिः ॐ तत्सत ।