रविवार, मई 05, 2013

काहू काहू में मगन - काहू काहू में

यह माना जाता है कि मनुष्य 'चौरासी लाख योनि 'का भ्रमण करते हुये अंत में मनुष्य योनि में जन्म लेता है ।
और यह भी मान्यता है कि मनुष्य योनि में जन्म लेने के लिये देवता भी लालायित रहते हैं । फिरभी हम
मनुष्य के रूप में जन्म लेकर भी इस अमूल्य अवसर को फिजूल ही गवां देते हैं । मनुष्य योनि में जन्म लेने का
हम फायदा नहीं उठा पाते ?और अन्त में पुनः 'चौरासी लाख योनि' का चक्कर लगाने हम वापस लौट जाते हैं ।

कहा यह भी जाता है कि विवेक शक्ति और किसी अन्य  योनि के जीव जंतुओं में नहीं होती,यह केवल मनुष्यों
को ही मिली है । पशु पक्षी या किसी अन्य योनि के प्राणी ,मात्र पेट भरने के लिये ही दिनरात भटकते रहते हैं उन्हें और किसी अन्य कार्य से न तो कोई मतलब है और न ही उन्हें इसकी फ़िक्र ,क्योंकि उनमें विवेकशक्ति
है ही नहीं । और विवेकशक्ति के होते हुये भी इन्शान उसका उपयोग न करे यह एक सोचनीय विषय है ।

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो घूम घूम कर पूरे धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर डालते हैं और सोचते हैं कि वे
पापमुक्त हो गये हैं ?लेकिन जैसे ही वे तीर्थस्थल से वापस आते हैं ,फिरसे पापकर्म में लग जाते हैं । मांसाहार ,जुवा ,ब्यभिचार ,एवम गलत कमाई करने से नहीं चूकते ?उन्हें देखकर उनपर बड़ा तरस आता है
और कहना पड़ता है कि काश वह अपने दुष्कर्मों से मुक्त हो जाता तो उसकी भी सद्गति हो जाती ?

मेरे कहने का आशय यह है कि मनुष्य को परमात्मा ने विवेकशक्ति जो दी है उसका वे  सदुपयोग नहीं
करके दुरूपयोग करते हैं और अपने अगले जन्म को बिगाड़ डालते हैं ?ऐसे लोग अपने विवेक का जिस तरह से
उपयोग करते हैं उस पर तरस आना स्वाभाविक है ?लेकिन यह भी सही है कि ऐसे लोग अनजाने ही ऐसा
नहीं करते । इनका कथन होता है कि यदि बार बार मनुष्य नहीं बनना है तो फिर इस जन्म को क्यों
न तरीके से जिया जावे ?मानो वे यही कहना चाहते हैं कि इन्द्रियां केवल भरपूर उपयोग के लिए ही है ,अतः
उसका भरपूर उपयोग करना चाहिए ?

हरिः ॐ तत्सत । 

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